25 अप्रैल 2026 की वह सुरमई दोपहर सचमुच एक यादगार साहित्यिक पर्व…

25 अप्रैल 2026 की वह सुरमई दोपहर सचमुच एक यादगार साहित्यिक पर्व बनकर हमारे सामने आई, जब “सखी सारथी – प्रेम से बंधी डोर” के स्नेहिल बैनर तले शायर संजीव ‘नादान’ के प्रथम ग़ज़ल संग्रह “आँख भर आई” का विमोचन एवं मुशायरा अत्यंत गरिमामय और आत्मीय वातावरण में दिल्ली में स्थित क्रिएटिव अनलॉक स्टूडियो, द्वारका में सम्पन्न हुआ।

निज़ामत का दायित्व डॉ॰ खुर्रम नूर जी ने ख़ूबसूरत अंदाज़ में निभाया। इस अवसर पर अध्यक्ष की भूमिका में उस्ताद शायर अब्दुल रहमान ‘मसूर’ साहब का सान्निध्य सभी के लिए प्रेरणास्रोत रहा। मुख्य अतिथि के रूप में टीवी एंकर व मशहूर शायर मोइन शादाब जी ने जिस आत्मीयता और गहराई से पुस्तक और रचनाकार को आत्मसात किया, वह अत्यंत सराहनीय रहा। विशिष्ट अतिथि की भूमिका में वरिष्ठ साहित्यकार डॉ॰ ओम निश्चल जी, डॉ॰ गुरविंदर बांगा जी, नीना सहर जी, सोनिया सोनम ‘अक्स’ जी की गरिमामयी उपस्थिति ने कार्यक्रम को और समृद्ध बनाया। हर एक वक्ता और शायर ने अपने शब्दों से न केवल साहित्य की ऊँचाइयों को छुआ, बल्कि श्रोताओं के हृदय को भी गहराई से स्पर्श किया। कार्यक्रम की शुरुआत से लेकर समापन तक जो अनुशासन, अपनापन और सकारात्मक ऊर्जा बनी रही।

25 अप्रैल 2026 की वह सुरमई दोपहर सचमुच एक यादगार साहित्यिक पर्व

इस पूरे आयोजन की आत्मा रहीं सखी सारथी की संस्थापिका शुभ्रा पालीवाल जी, जिनकी मेहनत, समर्पण और सूक्ष्म आयोजन क्षमता ने हर छोटे-बड़े पक्ष को सुंदरता से सँवारा। जिस प्रकार से उन्होंने और उनकी टीम ने आतिथ्य, व्यवस्था और सौहार्द का वातावरण निर्मित किया, वह हर उपस्थित व्यक्ति के मन में एक मधुर स्मृति के रूप में बस गया। शुभ्रा पालीवाल जी ने संजीव ‘नादान’ जी की “आँख भर आई” ग़ज़ल को अपने शानदार अंदाज़ में प्रस्तुत किया।

कार्यक्रम के दौरान प्रस्तुत काव्यपाठ का स्तर अत्यंत उच्च रहा। ग़ज़लों, गीतों और शायरी की विविधता ने महफ़िल को जीवंत बनाए रखा। श्रोताओं की सहभागिता और उनकी सराहना ने हर रचनाकार को और भी ऊर्जावान किया। सच कहा जाए तो यह एक ऐसी महफ़िल थी जहाँ शब्द केवल कहे नहीं गए, बल्कि महसूस किए गए।

कार्यक्रम का शुभारम्भ दीप प्रज़्ज़्वलन व मधुर कंठ की स्वामिनी पूजा श्रीवास्तव जी की सरस्वती वंदना के साथ किया गया। शायर शादाब अंजुम, सैयद अली अब्बास नौगांवी, कृष्णा शर्मा ‘दामिनी’, अजय अक्स, आशुतोष मिश्रा ‘अज़ल’, अदनान अहमद, समी बहुआरवी, शाकिर देहलवी, अरविन्द असर, भूपेन्द्र राघव, डॉ महेन्द्र शर्मा ‘मधुकर’, गोल्डी ग़ज़ब, प्रेरणा सिंह, हिमांशु शुक्ला, पूजा श्रीवास्तव और सचिन परवाना ने ज़बरदस्त शायरी प्रस्तुत की।

संजीव ‘नादान’ जी की ग़ज़लों में संवेदना, सादगी और सच्चाई का जो संगम देखने को मिला, वह उनके रचनात्मक व्यक्तित्व का प्रमाण है। “आँख भर आई” केवल एक पुस्तक नहीं, बल्कि अनुभवों और भावनाओं का जीवंत दस्तावेज़ है, जिसे श्रोताओं और पाठकों ने पूरे मन से स्वीकार किया।

इतने सारे गुणीजन एक ही मंच पर एकत्र हुए और एक सकारात्मक, सौहार्दपूर्ण वातावरण का निर्माण हुआ। यह आयोजन इस बात का प्रमाण रहा कि जब साहित्य और संवेदना साथ आते हैं, तो वे दिलों को जोड़ने का कार्य करते हैं।

रिपोर्ट – श्री ऋषि कुमार शर्मा