सृजनाभिनंदनम् 4
कल अप्रैल 25 को “वाङ्मय कला संगम”, के “सृजनाभिनंदनम् 4” समारोह में आमंत्रण के लिए इसके अध्यक्ष डॉ सिंघल जी और संरक्षक डॉ छोकर जी को धन्यवाद!
मैं समयानुसार 10.12 प्रातः बजे विष्णु दिगंबर मार्ग पर स्थित “हिंदी भवन” पहुँच गया। समारोह की तैयारी चल रही थी। डॉ सिंघल जी और डॉ छोकर जी व्यस्था की निगरानी कर रहे थे।
मैं जब पहुँचा, तो छोकर जी ने ही स्वागत किया। तभी, छोकर जी ने अपना परिचय एक किसान के रूप में दिया, एक विनयशील व्यक्तित्व के धनी! मैंने भी दिल की बात कह ही डाली कि किसान इस धरा का भगवान है। पूरी दुनिया के जीवन का आधार!
मैं तो इस बड़े आयोजन पर अशेष शुभकामनाएं देना चाहता हूँ जिसमें क्या कवि, क्या रचनाकार, क्या पत्रकार, दिल्ली के अतिरिक्त विविध प्रदेशों – उत्तर प्रदेश, राजस्थान, हरियाणा, मध्य प्रदेश, सिक्किम तक से, विविध कार्यक्षेत्रों में अपनी धाक रखने वाले कीर्तिधारक उपस्थित थे।
सरस्वती वंदन से आरम्भ हुए इस आयोजन में सुश्री डिंपल वर्मा ने गणेश-वंदना पर आधारित नृत्य प्रस्तुत किया। और, उसके बाद मंच पर आसीन – कविवर डॉ विनय कुमार सिंघल, साहित्यकार श्री संतोष कुमार हिंदवी, फिल्म एवं साहित्य से जुड़े श्री सैय्यद खालिद कैश, दिल्ली विश्वविद्यालय की एसोसिएट प्रोफेसर डॉ रीता नामदेव, ट्रू मीडिया के मुख्य संपादक डॉ ओमप्रकाश प्रजापति, डॉ कीर्ति वर्धन अग्रवाल, बाल साहित्य शोध सृजन पीठ की निदेशक डॉ मीनू पांडेय नयन – सरीखे सम्मानित वक्ताओं ने अपने काव्य-पाठ एवं विचारों को रखा।
मंचासिन आदरणीय व्यक्तियों के द्वारा कई पुस्तकों का विमोचन भी हुआ जिनमें ज्यादातर काव्य-संकलन ही थे – “माघ परिमल”, “अनुभूति”, “राग रंग रस गंध वर्ष नव”, “काव्य ऋतु रोहित”, “बृहत कहमुकरी संसार”! मजेदार बात यह कि डॉ सिंघल जी की अंग्रेजी में लिखित कविताओं का संकलन “kaleidoscope” का भी विमोचन इस आयोजन के दौरान किया गया।
डॉ ब्रह्मदत्त एवं डॉ छोकर के संयुक्त मंच-संचालन की भी दाद देनी होगी कि उन्होंने सिर्फ मंचासिन महानुभावों पर ही अपना ध्यान केंद्रित न रखकर अन्य कविगणों को भी काव्य-पाठ के लिए बीच-बीच में बुलाकर एक सामंजस्य बनाया रखा। डॉ छोकर ने उपस्थित ख्यातिप्राप्त व्यक्तियों का श्रोताओं से परिचय करवाया उनकी उपलब्धियों का जिक्र करते हुए।
वहाँ उपस्थित इन ख्यातिप्राप्त लोगों में 70 वर्ष की उम्र को हराने वाले कश्मीर से कन्याकुमारी तक साइकिल से यात्रा करने वाले साइक्लिस्ट श्री सोमपाल सिंह पुंडीर भी थे, पत्थर को तराश कर जीवंत बनानेवाले श्री पृथ्वी राज कुमावत, जयपुर, सोने की पत्तियों पर कमाल करने वाले राष्ट्रपति पुरस्कार से सम्मानित मिनिएचर आर्टिस्ट श्री हनुमान सैनी, वायर आर्टिस्ट उदित नारायण बैंसला जी, सेवा निवृत्त अधिकारी बने कवि सर्व श्री राजेश राज, ओम सपरा, साहित्य से सदियों से जुड़ी कई कवित्रियाँ थीं जिनमें अंजू कालरा दासन, अंतर्राष्ट्रीय साहित्यकार राधा पाण्डेय, सिक्किम जैसे कुछ नाम मुझे याद रह गए। हाँ, समाजसेवी भी थे, योगाचार्य भी! वर्ल्ड रिकॉर्डस होल्डर अनुज योगी, वर्ल्ड रिकॉर्डस होल्डर अर्जुन स्वामी, योग-आयुर्वेदाचार्य डॉ पहल सिंह सैनी जी व अन्य बहुत सारे लोग थे! ई रिक्शा चलाने वाले कवि श्री सुबोध कुमार कश्यप भी थे। मुझे तो सभी का नाम याद नहीं है, लेकिन सभी स्वनामधन्य थे।
इसतरह, बहुतों को सिर्फ शामिल ही नहीं किया गया, उन्हें सम्मानित भी किया गया जैसा कि आयोजन के दस्तावेज में भी स्पष्ट लिखा गया था – “सृजनाभिनंदनम् 4”!
बस, बड़े लोगों को सुनने में आनंद आ गया! अंत में यही कहना सार्थक होगा कि आप बुलाते रहें, हम आते रहेंगे। यह जरूरी भी हमारे जैसे पत्थर के लिए –
हम तो
पत्थर थे
अपना हुनर
मालूम न था,
आयोजनों ने
तराश कर
हीरा बना
दिया है !


