मध्य प्रदेश लेखक संघ की बहुउद्देशीय साहित्य गोष्ठी संपन्न

मुरैना

मध्य प्रदेश लेखक संघ जिला इकाई मुरैना की मासिक साहित्य गोष्टी शेल्टर पब्लिक स्कूल नैनागढ़ रोड मुरैना के सभागार में आयोजित की गई।

मध्य प्रदेश लेखक संघ द्वारा आयोजित इस बहुउद्देशीय साहित्यिक गोष्टी की अध्यक्षता मध्य प्रदेश के वरिष्ठ गीतकार डॉ देवेंद्र तोमर ने की तथा संचालन सुप्रसिद्ध कवि एवं गजलकर श्री मनोज मधुर ने किया। इस अवसर पर वरिष्ठ महिला पत्रकार श्रीमती ललिता दीक्षित मुख्य अतिथि तथा कहानीकार श्री रामबरन शर्मा विशिष्ट अतिथि के रूप में मंच पर आसीन रहे।

लेखक संघ का यह आयोजन रविवार को चरणबद्ध तरीके से अपनी पूरी गरिमा के साथ संपन्न हुआ।

कार्यक्रम के प्रथम चरण में मां शारदे की पूजा अर्चना, मंचासीन अतिथियों का स्वागत किया गया तत्पश्चात 31 मई पत्रकारिता दिवस को केंद्र में रखते हुए पत्रकार श्री रामबरन शर्मा ने भारतीय पत्रकारिता की अनवरत यात्रा का साहित्यिक विवरण प्रस्तुत किया। जिसका सभागार में मौजूद समस्त विद्वतजन समूह द्वारा तालियों की गड़गड़ाहट के साथ स्वागत किया गया।

अगले चरण में कवि श्री मनोज मधुर की धार्मिक कृति के प्रतिष्ठित अखबार अजय भारत में प्रकाशन का प्रदर्शन किया गया। घर में कृति बजरंग चालीसा के संबंध में अपने विचार प्रकट करते हुए साहित्यकार डॉ देवेंद्र तोमर ने कहा कि इस कृति में कवि श्री मनोज मधुर ने चौपाई छंद में हनुमान जी की स्तुति की है।

प्रतिष्ठित समाचार पत्र ‘दैनिक अजय भारत’ के रविवारीय अंक में मुख्य रूप से कृतिका प्रकाशन होना आज के दौर में साहित्य जगत के लिए सम्मान की बात है।

​डॉ तोमर ने कहा कि सहज एवं प्रवाहमयी भाषा में रचित इस चालीसा की मुख्य विशेषता यह है कि इसमें पवनपुत्र हनुमान जी के संपूर्ण जीवन-वृत्त की घटनाओं को क्रमानुसार, चार-चार पदों की 40 पूर्ण चौपाइयों में अत्यंत कलात्मक ढंग से पिरोया गया है। मेरा अटूट विश्वास है कि यह अनुपम कृति समस्त सनातन भक्तों के लिए अंत्यत कल्याणकारी और उपयोगी सिद्ध होगी।”

कार्यक्रम का अगला चरण आयोजन में उपस्थित रचनाकारों की शानदार कविताओं के साथ संपन्न हुआ।

कवि गोष्ठी में प्रस्तुत की गई कवियों की रचनाओं में डॉ देवेंद्र तोमर के गीत – ‘कुछ तो बात हुई लगती है/क्योंकि हवा में बहुत नमी है/आज कहीं पर कोई हमको/करके याद बहुत रोया है। श्री मनोज मधुर की रचना – ‘न हूर की तलब हमें न अप्सरा चाहिए/तबील जिंदगी मिले यही दुआ चाहिए। कवयित्री संपादक श्रीमती ललिता दीक्षित की रचना – धरती निगल गई आसमान निगल गया/वह उड़ता हुआ परिंदा जाने कहां गया। श्री दाताराम स्वदेशी की रचना – ‘प्रश्नों के अखबार क्यों हैं, नाम नहीं है हल का/कैसा होगा रूप हमारे आने वाले कल का । श्री मुरारी लाल प्रजापति की रचना – ‘अहम भाव की भरकर चाबी

दीनहीन पर होता हावी/जो बीज नफ़रत के बोता है/वह सभ्य पुरुष नहीं होता है।

​धौलपुर से पधारे हुए कई श्री प्रेम प्रसून की रचना – ‘कुष्ठ के समान, यदि फूटे अंग में विकार/

देर कीजिए न वो ही अंग काट डालिए। श्री राम कुमार रसिक की रचना – ‘​चना उसी के पास है यहाँ चबाने को/जिसके पास नहीं हैं दांत खाने को। ग्वालियर से पधारे कवि श्री नरेश श्रीवास्तव की रचना – ‘बिजली के खंभे पर चढ़ा हुआ आदमी

न भाषण देना जानता है

न नोट लजाना जानता है। को सभी श्रोता समूह द्वारा सराहा गया।

इस प्रकार अत्यंत हर्ष उल्लास और सद्भाव के वातावरण में मध्य प्रदेश लेखक संघ की मासिक साहित्य गोष्टी संपन्न हुई। कार्यक्रम के अंत में श्री मनोज मधुर की कृति बजरंग चालीसा का युटुब पर प्रसारण भी दिखाया गया।