DOI: 10.5281/sahitya24.2026.102 |
पेज संख्या: 12-25
डॉ. रमेश कुमार शर्मा, सह-प्राध्यापक, दिल्ली विश्वविद्यालय
सार (Abstract): प्रस्तुत शोध पत्र में 21वीं सदी में भूमंडलीकरण (Globalization) और डिजिटल क्रांति के कारण हिंदी भाषा की संरचना, शब्दावली और वैश्विक प्रसार पर पड़े प्रभावों का गहन अध्ययन किया गया है। शोध दर्शाता है कि तकनीक ने जहां नए अवसर दिए हैं, वहीं शुद्धता के स्तर पर चुनौतियां भी खड़ी की हैं।
DOI: 10.5281/sahitya24.2026.103 |
पेज संख्या: 26-38
प्रियंका मिश्रा, शोधार्थी (हिंदी विभाग), जेएनयू
सार (Abstract): यह लेख पिछले दो दशकों में लिखे गए प्रमुख महिला उपन्यासों का विश्लेषण करता है। इसमें पितृसत्तात्मक समाज के खिलाफ बदलती चेतना और कामकाजी महिलाओं के मानसिक द्वंद्व को रेखांकित करते हुए नारी विमर्श के नए आयामों को प्रस्तुत किया गया है।
DOI: 10.5281/sahitya24.2026.104 |
पेज संख्या: 39-51
प्रो. आलोक श्रीवास्तव, कला एवं संस्कृति विशेषज्ञ
सार (Abstract): नौटंकी, बिदेसिया और यक्षगान जैसी पारंपरिक लोक विधाओं का आधुनिक नुक्कड़ और थियेटर नाटकों में किस प्रकार समावेश हुआ है, यह पत्र इसी तकनीकी और कलात्मक संक्रमण का ऐतिहासिक लेखा-जोखा प्रस्तुत करता है।