पर्यावरण
हरीभरी धरा को यूँ
ना उजाड़िये
आने वाली पीढ़ी को
कुछ दे के जाइए….
हरिभरी धरा…….
रोकिए वनों की इस कटाई को
सुना सुना इस तरह ना कीजिए
है धरा सुहासिनी हरियाली से
इस तरह तबाह नाही कीजिए
साथ उसके चलकर
गुनगुनाइए…..
आने वाली पीढ़ी……….
सांसो की आधार प्राण प्यारी है
इनसे ही तो अपनी जिंदगानी हैं
पूर्वजों के जैसै ही इनको जानिए।
करिए सेवा वृक्ष की कहानी है।
सीधी सी बात है सबको बताइये..
आने वाली पीढ़ी …….
घट रही है सांसें घुट रहे है दम
आओ पौध मिलकर लगाये हम
दे गये निशानियां जो जा चुके
विरासतें जो दे गये बचाइये
मुस्कुराती इस धरा को ना बचाइए…..
आने वाली पीढ़ी को कुछ दे के जाइये…
हरिभरी धरा को यूं ना उजाड़िये…….
आने वाली पीढ़ी………

स्वरचित पूनम दुबे “वीणा”
अम्बिकापुर छत्तीसगढ़

