पर्यावरण

जहांँ पेड़ पौधा उगा, देते जीवन दान।
करते सेवा लोग जो ,होते बड़े महान।।

हरे भरे तरुवर जहाँ, देते हमको छाँव।
मानव उसको काटता , मिलता कहीं न ठाँव।।

देखो यह पर्यावरण , कितना है अनमोल।
जीवन में सबसे बड़ा, पेय सुधा रस धोल।।

करें भूमि श्रृंगार जब, हरियाली है जान।
अनुपम आभा देखकर, बढती उसकी शान।।

आदत सभी सुधार लो,कहते ज्ञानी लोग।
हर आँगन में पेड़ हो, बड़ा सुखद संजोग।।

विटप लगा कर करें, आस-पास को शुद्ध।
जीवन में आए नहीं, कोई भी अवरुद्ध।।

रास्ते में है फेंकते,कचरा कूड़ा लोग।
सड़ने पर है फैलता, जाने कितना रोग।।

आशा कहती सर्वदा, काटों न कभी पेड़
रखवाली करना सदा, करना मत तुम छेड़

रचनाकार- आशा उमेश पान्डेय अविरल