
जब तेरा कोई ख्वाब आता है।
सुर्ख चेहरे पे आब आता है।
मत सता ज्यादती से ही दुनिया ,
में सदा इंकलाब आता है।
दूरियाँ दिल में जब कभी आई
बीच में फ़िर हिसाब आता है।
चाह फूलों की है जब जाना ,
तब से ले कर ग़ुलाब आता है।
शैल, कहती है रोज़ महफ़िल में,
वो ले जाम- ए- शराब आता है।
शैल की ![]()
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