शब्द-शिल्पी का नव-दशक अभिनंदन
शब्द-शिल्पी का नव-दशक अभिनंदन
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बचपन की वे निश्छल घड़ियां, जब ‘साप्ताहिक हिन्दुस्तान’, ‘नंदन’ और ‘पराग’ जैसी कालजयी पत्रिकाओं के पृष्ठ मेरी चेतना का संस्कार रच रहे थे, आज उन्हीं स्वर्णिम स्मृतियों के सर्जक, यशस्वी संपादक, प्रख्यात गीतकार और युगद्रष्टा कवि आदरणीय बालस्वरूप राही जी के अभिनंदन-समारोह का सहभागी बनने का सौभाग्य प्राप्त हुआ।
वैश्विक हिंदी परिवार के तत्त्वावधान में 8 जून 2026 को साहित्य अकादेमी सभागार में आयोजित, राही जी के नवें दशक में प्रवेश के इस गरिमामय उत्सव में उपस्थित होकर मन श्रद्धा और गौरव से भर उठा। साहित्यिक जगत की इस ऐतिहासिक शाम की अध्यक्षता प्रख्यात साहित्यकार श्रीमती इंदिरा मोहन ने की, जबकि मुख्य अतिथि के रूप में सुप्रसिद्ध हास्य कवि श्री सुरेंद्र शर्मा उपस्थित रहे। कार्यक्रम को श्री अनिल जोशी और श्री राजेश चेतन का गरिमामय सानिध्य प्राप्त हुआ। समारोह में उनकी सुपुत्री श्रीमती गरिमा श्रीवास्तव की विशेष उपस्थिति भी सराहनीय रही। वक्ताओं में श्री नरेश शांडिल्य, श्री विज्ञान व्रत और श्री राजेंद्र राज निगम के साथ मेरी भागीदारी रही।
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पूरे कार्यक्रम का अत्यंत कुशल और सारगर्भित संचालन डॉ. अनिता वर्मा द्वारा किया गया। समारोह के सफल आयोजन में वैश्विक हिंदी परिवार के मानद निदेशक विनयशील चतुर्वेदी, दिल्ली इकाई के अध्यक्ष ऋषि कुमार शर्मा और कार्यक्रम संयोजक डॉ. शिवम शर्मा की मुख्य भूमिका रही।
स्वाभिमान के उत्तुंग हिमालय और विनम्रता के अगाध रत्नाकर राही जी ने कभी जड़ता के सम्मुख अपना मस्तक नहीं झुकाया। उनकी निर्भीक लेखनी का स्वर आज भी उतना ही प्रखर है।
उनका व्यक्तित्व जितना विराट है, उतना ही संवेदनशील भी। उनका भाल पर्वत-सा ऊंचा है, किंतु उनका हृदय पराई पीड़ा से मोम की तरह पिघल उठता है।
हिंदी गीत परंपरा के इस महानायक ने न केवल गीतों को आधुनिक संवेदनाओं का नया आकाश दिया, बल्कि काव्य-मंचों को भी वैचारिक गरिमा, शुचिता और सृजनात्मक ऊंचाइयों से आलोकित किया।
जीवन के इस दैदीप्यमान नव-दशक के पावन अवसर पर आदरणीय राही जी का हार्दिक अभिनंदन। आप चिरायु हों, स्वस्थ रहें और आपके गीतों की यह अनश्वर गूंज युगों-युगों तक मानवता के हृदय को स्पंदित एवं झंकृत करती रहे।

