निशब्द -SEEMA KUMAR
राजू अपने माँ-पापा का बहुत ख़्याल रखा करता था । वैसे तो वह तीन भाई थे, पर बाकी के दो भाई अपने-अपने जीवन में व्यस्त रहते थे।

एक ही घर में रहते हुए भी माँ और भाईयों का मिलना रोज़ नहीं हो पाता था । बूढ़े माँ-पापा की हर ज़रूरत को पूरा सिर्फ़ राजू ही किया करता था । यहाँ तक की अपनी कमाई के सारे पैसे वह माँ के हाथ में रख दिया करता था पर उसकी माँ को लेना पसंद नहीं था। बोला करती थी, “तुम तो मेरी हर ज़रूरत को पूरा करते हो फिर मैं ये पैसे ले कर क्या करुँगी ?”और पैसे वापस दे दिया करती थी ।
बहुत से रिश्ते राजू के लिए आया करते थे पर वह हमेशा शादी से इंकार कर देता। उसे लगता, कहीं उसके दोनों भाभियों के जैसी ही पत्नी उसे मिल गई तो वह क्या करेगा ?
“नहीं नहीं मै कभी शादी नहीं करूँगा , आजीवन अपने माँ-पापा का ख़याल रखूँगा ।”
इसी तरह जीवन बीत रहा था राजू का ।
एक दिन उसकी माँ की तबीयत बहुत ख़राब हो गई। हॉस्पिटल ले जाने की नौबत आ गई।फिर एक सप्ताह से राजू की माँ हॉस्पिटल में ही थी ।उसके बड़े दोनो बेटे एक बार मिलने आए थे|
“कुछ काम होगा तो बता देना ।ऑफिस के कामों से फ़ुर्सत ही नहीं मिलता और तुम्हारी बहू को घर के कामों से, वो बेचारी तो दिनभर बच्चों में बिज़ी रहती है ।” यह बोल राजू का बड़ा भाई रूम से निकल गया था ।राजू की माँ बस देखते ही रह गई । कभी कभी उसे भी लगता था कि राजू की शादी हो जाएगी तो वह भी अपने दोनों भाईयों जैसा ही हो जाएगा ,क्योंकि शादी के पहले वो दोनों भी राजू के तरह ही थें ।
लेकिन पार्वती राजू की बहुत चिन्ता किया करती थी । अंदर ही अंदर सोचा करती अगर मैं और उसके पापा नहीं रहे तो राजू का ख़्याल कौन रखेगा । यह सब सोच ही रही थी की तभी एक नर्स रूम मे आई, उसकी बिपी चेक की और टाइम पर दावाई लेने बोल कर चली गई ।
पार्वती मन ही मन उसको देख सोचा करती, राजू को भी ऐसी लड़की मिल जाती तो मेरा जीवन सफल हो जाता ।तभी राजू खाना ले कर आया और अपनी माँ को खिलाने लगा । पार्वती आज थोड़ा अच्छा महसूस कर रही थी । वो राजू को बोली ” बेटा, अब मेरी तबीयत ठीक है ,घर चलते हैं ।” तभी राजू बोला, ” डॉक्टर अभी तीन दिन और रहने बोला है माँ। जैसा डॉक्टर बोलेगा , वैसा ही करुँगा ।” यह कह कर राजू रूम से बाहर दवाई लेने चला गया ।
अब बस एक दिन ही बचा था हॉस्पिटल में। आज तो पार्वती अपने दिल की बात उस नर्स से बोल बैठी “बेटा तुम्हारे घर में और कौन-कौन हैं?”
नर्स बोली “बस मेरी माँ है, मेरी जिंदगी ।”
पार्वती फिर पूछी “तुमने शादी नहीं किया?”
यह सब सुन कर उस नर्स को बड़ा अजीब लग रहा था। फिर भी वो बोली “ आंटी, मै शादी नहीं कर सकती ।मेरी माँ की मै ही सब कुछ हूँ। बेटा भी ओर बेटी भी। उसको छोड़ कर मैं कही नहीं जा सकती । शादी के बाद तो मुझे ससुराल वाले के अनुसार चलना पड़ेगा इसलिए मै कभी भी शादी नहीं करुँगी।”
इतना बोल वह रूम से जा ही रही थी तभी राजू की माँ बोली,” अगर तुम्हारे ससुराल वाले तुम्हारे अनुसार रहेंगे तो क्या तब भी नहीं करोगी?”
नर्स बोली “माजी , आप मेरी चिंता ना करे आप अपना ख्य़ाल रखे ।आपका इतना अच्छा बेटा है राजू । आपका कितना अच्छे से ख़्याल रखता है । इस दुनिया मे अब राजू जैसा बेटा बहुत कम होगा।मैं अपनी माँ के लिए भी आपके राजू जैसा बेटा हूँ इसलिए मै शादी नहीं करुँगी कभी । सदैव अपनी माँ का ख़्याल रखूँगी ।”
यह सब सुन कर पार्वती को बहुत अच्छा लग रहा था। मन ही मन सोच रही थी कि काश राजू को यह लड़की मिल जाती , दोनों की कहानी कितनी मिलती हैं ।
राजू अपने माँ-पापा के लिए शादी नहीं कर रहा और ये भी अपनी माँ के चलते शादी नहीं कर रही । भगवान की भी क्या लीला है । एक जैसा दो लोग बनाए पर एक दूसरे के लिए नहीं ।मन की बाते मन में रखे पार्वती नर्स के सामने निःशब्द रह गई ।
