Description
“जी चाहता है” कविताओं का एक ऐसा गुलदस्ता है जिसमें मन की अनगिनत इच्छाएँ, सपने, प्रेम, संवेदनाएँ और जीवन के विविध रंग समाहित हैं।
इस संग्रह की प्रत्येक कविता पाठकों को अपने भीतर झाँकने, अपने सपनों को महसूस करने और जीवन की छोटी-छोटी खुशियों को नए दृष्टिकोण से देखने के लिए प्रेरित करती है। सरल शब्दों में लिखी गई ये कविताएँ दिल की गहराइयों से निकलकर सीधे पाठकों के हृदय तक पहुँचती हैं।
यह पुस्तक उन सभी के लिए है जो भावनाओं की दुनिया में खो जाना चाहते हैं और शब्दों में जीवन की सुंदरता तलाशते हैं।
🌟 पुस्तक का टैगलाइन (Slogan)
- “जहाँ हर कविता एक नई चाहत को जन्म देती है।”
- “दिल की बातों को शब्दों में पिरोता एक काव्य-संग्रह।”
- “मन की उड़ान, भावनाओं की पहचान।”
- “जब सपने शब्द बन जाएँ।”
- “हर पन्ने पर एक नई चाहत, एक नया एहसास।”
📚 बैक कवर टेक्स्ट
“जी चाहता है” केवल कविताओं का संग्रह नहीं, बल्कि मन की उन अनकही भावनाओं का प्रतिबिंब है जो हर व्यक्ति के जीवन में कभी न कभी जन्म लेती हैं।
इन कविताओं में प्रेम है, उम्मीद है, सपने हैं, संघर्ष है और जीवन को सुंदर बनाने वाली छोटी-छोटी इच्छाओं की मधुर अभिव्यक्ति है।
यदि आप कविता प्रेमी हैं और शब्दों में अपने मन की परछाईं ढूँढ़ना चाहते हैं, तो यह पुस्तक आपके लिए एक सुखद अनुभव सिद्ध होगी।
👩💼 लेखिका परिचय
केशी गुप्ता एक संवेदनशील कवयित्री हैं, जिनकी रचनाएँ मानवीय भावनाओं, प्रेम, जीवन-दर्शन और मन की सूक्ष्म अनुभूतियों को सरल एवं प्रभावशाली शब्दों में व्यक्त करती हैं। उनकी कविताएँ पाठकों को स्वयं से जुड़ने और जीवन को सकारात्मक दृष्टि से देखने की प्रेरणा देती हैं।
विशेष प्रचार पंक्ति
“जी चाहता है — मन की हर चाहत को शब्दों में जी लेने की एक खूबसूरत कोशिश।” ❤️📖🌸

