गीत रचयिता- राजवीर सिंह देवसर समीक्षक- डॉ राजकुमार रंजन

गीत रचयिता- राजवीर सिंह देवसरसमीक्षक- डॉ राजकुमार रंजन

गंगा यमुना वट तट जायें

गीत रचयिता- राजवीर सिंह देवसर
समीक्षक- डॉ राजकुमार रंजन

महर्षि वाल्मीकि कृत रामायण के “आदित्य हृदय स्त्रोत ” में रवि का नाम कवि भी है कवि को “कर्वि विश्वो महातेजाः” अर्थात् त्रिकालदर्शी,सर्व स्वरूप और महा तेजस्वी कहा गया है । यही कवि का तेजस्वी स्वरूप सम्पूर्ण विश्व के चराचर में संवाहित होता है वह कविता रूपी किरणों का संवाहक है जो प्राणियों में चेतना भरने का कार्य करता है वह मेघों को उत्पन्न करने वाला है । कवि देवसर सरस्वती नदी के प्रदेश में उत्पन्न हुआ साक्षात सरस्वती पुत्र है इसीलिए उसके हृदय स्थल में अंदर ही अंदर उसका वास है, कभी कवि बादल बन कर बदली के संग रिमझिम करता है तो कभी मथुरा वृन्दावन गोकुल निधिवन में रसिया बन जाता है वह अधरों पर बॉसुरी को धर को सातों स्वरों से संसार को सम्मोहित करता है यही प्रेम का संसार श्वासों-प्रश्वासों के माध्यम से संगीत का आधार बनता है ।
कहने का तात्पर्य यह है कि कवि का सांसारिक कार्य भी चेतना , जाग्रति ,प्रेम और विश्वास को पैदा करना है ।
अनेक प्रतीकों यथा मेघदूत, चापू आदि का प्रयोग कविता के सौन्दर्य को बढ़ाने वाले हैं
साधुवाद !