कविताओं का बै नी आ ह पी ना ला ” का हुआ लोकार्पणसाहित्य साधक मंच की काव्य गोष्ठी में झूमे श्रोता

बेंगलुरु (साहित्य 24 प्रतिनिधि)- बेंगलुरु की प्रतिष्ठित साहित्यिक संस्था साहित्य साधक मंच का 227 वां मासिक सारस्वत कार्यक्रम आल इंडिया रेडियो बेंगलुरु के पूर्व निदेशक श्री मिलनसार अहमद की अध्यक्षता और दिल्ली के वरिष्ठ साहित्यकार श्री राजेन्द्र निगम राज व श्रीमती इंदु राज निगम के मुख्य आतिथ्य में संपन्न हुआ। सागर, मध्यप्रदेश से पधारे वरिष्ठ साहित्यकार डॉ महेंद्र सिंह गौर एवं लखनऊ के चर्चित व्यंग्यकार श्री विनोद कुमार भावुक जी ने विशिष्ट अतिथि के रूप में मंच की शोभा बढ़ाई।

कार्यक्रम का शुभारम्भ पद्मा श्रीनिवासन वसुधा द्वारा प्रस्तुत माँ शारदे की वंदना से हुआ। कार्यक्रम के प्रथम सत्र में राजेंद्र निगम राज द्वारा विरचित काव्य संग्रह “कविताओं का बै नी आ ह पी ना ला ” का लोकार्पण मंचासीन अतिथियों द्वारा किया गया। इससे पूर्व भूपेंद्र सिंह कटाक्ष ने लेखक का एवं मंजू वेंकट ने पुस्तक का परिचय दिया। इस अवसर पर मंच की ओर से मुख्य अतिथि राजेंद्र निगम राज एवं इंदु राज निगम का अभिनन्दन कर्नाटक शैली में किया गया।अपने उद्बोधन में राजेंद्र निगम राज ने पुस्तक “कविताओं का बै नी आ ह पी ना ला ” की विशेषताओं पर प्रकाश डालते हुए साहित्य साधक मंच द्वारा अहिन्दी भाषी प्रदेश कर्नाटक में विगत 19 वर्षों से हिंदी के प्रचार-प्रसार और स्थानीय भाषा कन्नड़ के साथ समन्वय की दिशा में किये जा रहे कार्यों की सराहना की ।
कार्यक्रम के द्वितीय सत्र में सरस काव्य गोष्ठी का आयोजन हुआ जिसमें सर्वश्री मिलनसार अहमद, राजेन्द्र निगम राज, इंदु राज निगम, डाॅ महेंद्र सिंह गौर, विनोद कुमार गुप्त ‘भावुक’, डॉ सुनील पवार, डॉ साकेत प्रवीर, डाॅ अनिता निहालानी, प्रीति राही, राही राज़, भूपेंद्र सिंह “कटाक्ष”, अर्जुन सिंह धरमधारी, सूबेदार रामस्वरूप कुशवाह, श्वेता शर्मा, मंजू वेंकट, नारायण सिंह, नयना जैन, एडवोकेट अंजु भारती, सुधा दीक्षित, पद्मा श्रीनिवासन वसुधा, डाॅ मृदुला सिंह चौहान, सुधा अहलुवालिया, नमिता सिन्हा, राधेश्याम यादव ‘सुदर्शन’, दीपक पांडे, काव्या खन्ना, बापू गौड़ा पाटिल, गीता चौबे गूँज, ज्ञानचंद मर्मज्ञ, उमा नाग, रंजीता भारती, रघुबीर अग्रवाल बंधू, गिरिजा कुलश्रेष्ठ व पहाड़ सिंह आदि ने अपनी उत्कृष्ट रचनाओं से श्रोताओं को मन्त्रमुद्ध कर दिया।
कार्यक्रम के पश्चात् स्वादिष्ट अल्पाहार की व्यवस्था अर्जुन सिंह धर्मधारी के सौजन्य से किया गया। कार्यक्रम का संचालन ज्ञानचंद मर्मज्ञ और मंजू वेंकट ने किया।