छठ महापर्व समन्वय मंच द्वारा प्रकाशित “छठ महापर्व स्मारिका-2026” भी विशेष आकर्षण का केंद्र
समारोह के अवसर पर छठ महापर्व समन्वय मंच द्वारा प्रकाशित “छठ महापर्व स्मारिका-2026” भी विशेष आकर्षण का केंद्र रही। इस स्मारिका के माध्यम से छठ महापर्व की धार्मिक आस्था, आध्यात्मिक महत्व, लोक परंपराओं, सांस्कृतिक विरासत और सामाजिक सरोकारों को एक ही मंच पर संजोने का सार्थक प्रयास किया गया है। स्मारिका में छठ पूजा से जुड़ी सदियों पुरानी परंपराओं के साथ-साथ वर्तमान समय में इस महापर्व के बदलते स्वरूप और समाज पर उसके व्यापक प्रभाव को भी रेखांकित किया गया है।

स्मारिका में विभिन्न क्षेत्रों से जुड़े लोगों के छठ महापर्व से संबंधित व्यक्तिगत अनुभव, संस्मरण, भावनाएं, विचार, कविताएं, कहानियां एवं अन्य साहित्यिक रचनाओं को स्थान दिया गया है। इन रचनाओं के माध्यम से यह बताने का प्रयास किया गया है कि छठ केवल एक धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि परिवार, समाज, प्रकृति, लोक संस्कृति और सामूहिक आस्था को जोड़ने वाला एक महत्वपूर्ण सांस्कृतिक पर्व है।
विशेष रूप से उन लोगों के अनुभवों को शामिल किया गया है, जिनके जीवन में छठ महापर्व बचपन से ही किसी न किसी रूप में जुड़ा रहा है। किसी के लिए यह मां के साथ घाट पर जाने की स्मृति है, तो किसी के लिए परिवार के साथ मिलकर प्रसाद तैयार करने और व्रत रखने की परंपरा। किसी के लिए छठ अपने गांव और मिट्टी की याद है, तो किसी के लिए महानगर में रहते हुए अपनी सांस्कृतिक जड़ों से जुड़े रहने का माध्यम। इस प्रकार स्मारिका में प्रकाशित अनुभवों ने छठ की भावनात्मक एवं मानवीय तस्वीर को भी सामने रखा है।
स्मारिका के संपादकीय एवं प्रकाशन कार्य को व्यवस्थित रूप देने में हरि प्रकाश पाण्डेय – संपादक, स्मारिका तथा सी. के. भट्ट – सह-संपादक, स्मारिका की महत्वपूर्ण भूमिका रही। विभिन्न रचनाओं एवं सामग्री के संकलन, संपादन, संयोजन और प्रकाशन की प्रक्रिया में दोनों ने सक्रिय योगदान दिया। प्रयास रहा कि स्मारिका में प्रकाशित सामग्री छठ महापर्व की गरिमा, व्यापकता और सामाजिक संदेश को प्रभावी ढंग से पाठकों तक पहुंचा सके।
स्मारिका में छठ पूजा के सामाजिक, सांस्कृतिक और मानवीय पक्ष को भी प्रमुखता दी गई है। छठ महापर्व किस प्रकार जाति, वर्ग, भाषा और क्षेत्र की सीमाओं से ऊपर उठकर लोगों को एक साथ जोड़ता है, इस भावना को विभिन्न आलेखों और रचनाओं के माध्यम से अभिव्यक्त किया गया है। घाटों की स्वच्छता, सामाजिक सहयोग, जरूरतमंदों की सहायता, सामूहिक आयोजन तथा पर्यावरण के प्रति जिम्मेदारी जैसे विषय भी इस व्यापक सामाजिक चेतना का हिस्सा हैं।
छठ महापर्व मूलतः सूर्योपासना और प्रकृति के प्रति कृतज्ञता का पर्व है। इसी भावना को ध्यान में रखते हुए स्मारिका में सूर्य, जल, प्रकृति, स्वच्छता और लोक आस्था से जुड़े पहलुओं को भी रेखांकित किया गया है। इसमें यह संदेश निहित है कि परंपराओं का संरक्षण केवल उन्हें निभाने से नहीं, बल्कि उनके मूल सामाजिक और सांस्कृतिक मूल्यों को अगली पीढ़ी तक पहुंचाने से भी होता है।
“छठ महापर्व स्मारिका-2026” इस दृष्टि से केवल एक प्रकाशन नहीं, बल्कि आस्था, स्मृति, साहित्य और लोक संस्कृति का दस्तावेज बनने का प्रयास है। इसमें शामिल रचनाएं और अनुभव आने वाली पीढ़ियों को यह समझने में मदद करेंगे कि छठ महापर्व लोगों के जीवन में केवल चार दिनों का धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि वर्ष भर की भावनाओं, पारिवारिक संस्कारों, सामाजिक संबंधों और सांस्कृतिक पहचान से जुड़ा हुआ पर्व है।
इस स्मारिका के माध्यम से छठ महापर्व की समृद्ध परंपरा को शब्दों में सुरक्षित रखने और समाज की सामूहिक स्मृतियों को दस्तावेज के रूप में संजोने का प्रयास किया गया है। यही कारण है कि “छठ महापर्व स्मारिका-2026” छठ की आस्था, लोक संस्कृति, सामाजिक एकता और पीढ़ियों से चली आ रही परंपराओं के संरक्षण की दिशा में एक महत्वपूर्ण साहित्यिक एवं सांस्कृतिक प्रयास के रूप में सामने आती है।
