सुनो…

सुनो…Manjula Sharma

सुनो…

तुमने मुझे कभी चूड़ियाँ नहीं ख़रीदीं,
पर जब मेरी आँखें हमेशा के लिए बंद हो जाएँ,
तो मुझे चूड़ियाँ पहनाकर विदा करना।

सुनो…

तुमने मुझे कभी बिंदी नहीं ख़रीदी,
पर जब मेरी आँखें बंद हों
तो मेरे माथे पर एक सुर्ख बिंदी सजा देना।

सुनो…

तुमने मुझे कभी पायल नहीं ख़रीदी,
पर जब मैं इस दुनिया से रुख़्सत होऊँ,
तो मेरे पैरों में पायल पहना देना।

सुनो…
तुमने मुझे कभी साड़ी नहीं ख़रीदी,
पर जब मेरी आँखें बंद हो जाएँ,
तो मुझे लाल साड़ी पहनाकर विदा करना।

अब उम्र के इस पड़ाव पर
मुझे तुमसे कोई शिकायत नहीं है।
न कोई गिला, न कोई मलाल।

बस… जब मेरी आँखें बंद हों हमेशा के लिए,
तो मेरी रूह को इतना सुकून दे देना,
इतना एहसास दे देना
कि मैं सिर्फ़ तुम्हारे नाम की नहीं,
तुम्हारे दिल से भी पत्नी थी।

इतना करोगे न मेरे लिए
वो जो सारी दुनिया को छोड़कर
तुम्हारे संग चली थी मेरे उस फैसले का सम्मान करोगे न मेरे लिए
…?

वादा करो।