मेहनती – Rimmi Verma

रिद्धि एक जानी मानी सिंगर है। उसके अपने शहर में उसे कौन नहीं जानता!
यही नहीं देश के कोने कोने से उसे स्टेज शो के लिए बुलाया जाता है। आये दिन उसकी चर्चा अखबारों में होती रहती है।
हाँ ये भी तो सही है की उसे ये मुकाम ऐसे ही नहीं मिला था। इसके लिए उसने काफ़ी मेहनत भी की थी। अपनी सफलता के रास्ते में आनेवाले हर अवरोध को उसने अपनी प्रबल इच्छाशक्ति की तेज प्रवाह में तिनके की भाँती उड़ा दिया था।
वह एक नामी गायिका ही नहीं एक जानी मानी समाज सेविका भी है l
समाज के पिछड़े और कमजोर वर्ग की वो दिल खोलकर सहायता करती है l
वह अपनी माँ के नाम पर एक अनाथालय भी चलाती है l

किन्तु आज वह जिस माँ के नाम पर अनाथालय चलाती है। क्या उसी माँ को कभी उसने उचित सम्मान दिया -?
बिलकुल नहीं !उसने तो बस अपनी माँ का फायदा उठाया। उसे पता था कि गृहस्थी की चाहरदीवारी में माँ के अरमान दफ़न हो गयें थें।
उसने बस उसी दबे अरमानों की चिंगारी को सुलगाया और अपने
पिता के अनुशासन की चाबुक से बचने के लिए अपनी माँ को ढाल के रूप में इस्तेमाल किया।
जब तक माँ को उसकी असलियत पता चली। तब तक रिद्धि की लालसाओं के नाखुन इतने बढ़ चुके थे कि उसने उन्हीं नाखुनों से अपनी माँ की ममता का खून कर दिया था।
और उसी खून का इल्जाम माँ पर ही डाल दिया था l
ऐसे में अपने ही कत्ल के इल्जाम पर बेचारी माँ कोई सफाई भी न दे सकी । और अंत में घुट घुट कर मर गई।
इसी तरह भाई – बहन से लेकर दोस्तों तक को वो अपने फायदे के लिए इस्तेमाल किया करती l और फिर काम खत्म होते ही उन लोगों पर ही कोई न कोई इल्ज़ाम लगा कर उनसे किनारा कर लेती थी!

लेकिन एक बात उसकी बहुत अच्छी थी। वो हमेशा के लिए सबसे दूर नहीं रहती ।जब कभी भी किसी से भी कोई मतलब निकल आता ,वो माफी मांगने में भी देर नहीं लगाती थी।
अपने लक्ष्य की प्राप्ति के लिए वो अपने आत्मसम्मान तक को दाव पर लगा दिया करती थी।

संवेदनशील तो इतनी थी कि हर छोटी सी बात पर उसके आंसू निकल आते थे।
क्योंकि उसे पता था कि इसी पल के इंतज़ार में न जाने कितने दिल धड़कते हैं।
ताकि वो रिद्धि को अपने मजबूत कंधों का सहारा देकर उसके आंसू पोछ सकें!

और वो भी कभी किसी को निराश नहीं करती है। उस वक़्त उसके के लिए जो कोई भी उपयोगी होता है l वो उनका इस्तेमाल जरूर करती है।
लेकिन किसी का दिल नहीं तोड़ती l
क्योंकि वह हर किसी से दिल से प्यार करती है।
पर हाँ किसी के प्यार में वो कभी अपना दिल नहीं हारती है।
इसी कारण से कुछ लोग उसे मौकापरस्त कहतें हैं।
पर वो तो प्रैक्टिकल है।
तभी तो सफलता उसके कदम चूमती है।
क्योंकि अपनी मज़िल का पता उसे मालूम है l
और इसी कारण उसे यह पता है कि- किसे अपने रास्ते से हटाना है! कैसे किसको बदनाम करना है! कैसे अपनी गलतियों का दोष दूसरे के सिर पर मढ़ना है!
कैसे खुद को बेचारी बना कर लोगों की साहनभूति हासिल करनी है!
ये सब तो उसे बखूबी आता है। और इन सभी चीजों पर वो खूब मेहनत भी करती है। साथ ही दिमाग़ भी लगाती है l
तभी तो वह अपने साथियों से हमेशा चार कदम आगे निकल जाती है।
सच-हर किसी में कहाँ भला ऐसी खासियत होती है!
लोग उसे नाहक ही दोष देते हैं। कि हाय इसने तो मेरा फायदा उठाया। मुझे बेवकूफ बनाया।

लेकिन वो ये बात नहीं मानती l
बल्कि वो तो कहती है- कि सब मुझसे जलते हैं।
मैं तो दिन रात मेनहत करती हूँ l तभी तो अपनी मेहनत और काबिलियत के बल पर इस मुकाम पर पहुँची हूँ।
लेकिन किसी को मेरी मेहनत दिखाई ही नहीं देती है l
उल्टे सब लोग मुझे मौकापरस्त कहतें हैं।
सच ! में वो बहुत मेहनत करती है! ।जो यक़ीनन हर कोई नहीं कर सकता है!

रिम्मी वर्मा ( स्व रचित)
रांची (झारखंड)