रामपुर में श्री ललिता त्रिपुरेश्वरी शक्तिपीठ की प्रमुख डॉ. प्रियंका शुक्ला का उत्साहजनक अभिनंदन: सनातन एकजुटता की यात्रा से राष्ट्र उत्थान का प्रेरणादायी संदेश
रामपुर में श्री ललिता त्रिपुरेश्वरी शक्तिपीठ की प्रमुख डॉ. प्रियंका शुक्ला का उत्साहजनक अभिनंदन: सनातन एकजुटता की यात्रा से राष्ट्र उत्थान का प्रेरणादायी संदेश
रामपुर, 22 नवंबर 2025: सनातन धर्म की अमर ज्योति को नई ऊर्जा प्रदान करने वाली इस अनमोल यात्रा के शुभ समापन पर रामपुर नगरी में एक जीवंत उत्सव का वातावरण व्याप्त हो गया। बागेश्वर धाम के आध्यात्मिक मार्गदर्शन में 7 से 16 नवंबर तक संपन्न हुई महान सनातन यात्रा में उत्साहपूर्वक भागीदारी निभाकर वापस लौटीं श्री ललिता त्रिपुरेश्वरी शक्तिपीठ की कार्यकारी प्रमुख डॉ. प्रियंका शुक्ला दीदी का स्थानीय निवासियों ने भावपूर्ण स्वागत से सम्मानित किया। शक्तिपीठ के निष्ठावान सदस्यों ने पारंपरिक धुनों, पुष्पवर्षा और जोशीले घोषणापत्रों के माध्यम से उनका हार्दिक अभिवादन किया, जो इस यात्रा की विजय और सनातन आदर्शों की अजेयता का जीवंत प्रमाण बन गया।
डॉ. शुक्ला का यह आगमन शक्तिपीठ परिवार के लिए तो गर्व का क्षण रहा ही, पूरे जिले के लिए एक प्रेरक दृष्टिकोण लेकर आया। यात्रा के दौरान विविध पवित्र स्थलों पर सनातन धर्म की गरिमा, एकता की अपार क्षमता तथा सामाजिक समन्वय को सशक्त बनाने वाली विविध क्रियाकलापों में उन्होंने अग्रणी भूमिका अदा की। लौटते ही जिले के सभी आदरणीय नागरिकों को इस यात्रा के सहयोग एवं उत्साहवर्धन हेतु कृतज्ञता व्यक्त करने के लिए एक भव्य संवाद सत्र का प्रबंध किया गया। यह संवाद सत्र मीडिया प्रतिनिधियों के लिए एक प्रमुख मंच तो बना ही, सामान्य जनता के लिए सनातन सिद्धांतों की गहन व्याख्या प्रदान करने वाला एक अनुपम अवसर भी सिद्ध हुआ।
संवाद सत्र का शुभारंभ डॉ. प्रियंका शुक्ला दीदी के प्रेरणास्पद भाषण से हुआ, जिसमें उन्होंने इस यात्रा को सनातन एकजुटता की एक ऐतिहासिक एवं भव्य पहल के रूप में वर्णित किया। उनके कथन में कहा गया, “सनातन का तात्पर्य है शाश्वत, अर्थात् अनादि एवं अनंत, जो समय की धारा में कभी मद्धिम नहीं पड़ता। यह वह पवित्र सत्ता है जो मानव जीवन को सेवा, दया एवं समर्पण की प्रेरणा से आलोकित करती है। सनातन धर्म मात्र एक धार्मिक परंपरा नहीं, अपितु जीवन का वह गहन दर्शन है जो प्रेम की कोमल लहर, सौहार्द की मधुर सुगंध तथा सामंजस्य की साक्षात् मूर्ति को प्रकट करता है।” उन्होंने आगे बल देते हुए कहा कि सच्चा देशभक्त कभी सनातन धर्म का विरोध नहीं करेगा, क्योंकि यही धर्म राष्ट्र की आधारशिला को दृढ़ता प्रदान करता है। “जो व्यक्ति स्वयं को सनातनी मानता है, वह न केवल अपने दायित्वों का पालन करता है, अपितु राष्ट्र एवं समाज के उत्थान हेतु सतत प्रयत्नशील रहता है। यह यात्रा हमें यही उपदेश देती है कि एकता ही हमारी सर्वोच्च सामर्थ्य है।”
डॉ. शुक्ला ने राष्ट्र की समकालीन समस्याओं पर गहन विचार-विमर्श करते हुए अपनी वाणी को और अधिक प्रासंगिकता प्रदान की। उन्होंने कहा कि भारत जैसे विशाल एवं विविधतावादी देश में आतंकवाद की भयावह परछाईं, गौहत्या जैसी क्रूर रीतियों तथा महिला उत्पीड़न की पीड़ादायी घटनाओं से संपूर्ण मुक्ति हेतु सभी वर्गों, समुदायों एवं व्यक्तियों को एकत्रित होकर प्रगति करनी होगी। “यदि हम विभेद की ज्वाला में भस्मीभूत होते रहेंगे, तो ‘विभाजन से विनाश’ का कष्टपूर्ण सिद्धांत सदैव हमारे साथ जुड़ा रहेगा। किंतु यदि हम सजग होकर एक-दूसरे का सहारा बनें, तो न केवल इन विपत्तियों से छुटकारा पा सकते हैं, अपितु एक मनोहर, सुव्यवस्थित एवं समृद्ध समाज तथा राष्ट्र की रचना कर सकते हैं। सनातन यात्रा हमें यही आह्वान करती है – जागो, एकत्र हो जाओ तथा राष्ट्र निर्माण के मार्ग पर अग्रसर हो जाओ।”
यह संवाद सत्र शक्तिपीठ के समर्पित सहयोगियों की उपस्थिति से और अधिक समृद्ध एवं जीवंत हो उठा। प्रमुख सहयोगियों में वेदप्रकाश शर्मा, जिन्होंने यात्रा के दौरान प्रशासनिक दायित्वों का कुशल संचालन किया; कनु अग्रवाल, जो सामाजिक सद्भाव के प्रसार में अग्रणी रहीं; ममता सोनी, जिनकी निस्वार्थ सेवा यात्रा की नींव बनी; दीपा गुप्ता, जो युवा ऊर्जा का प्रतीक हैं; कमल चावला, शालू शर्मा, रूपम गुप्ता तथा प्रदीप पंडित समेत अन्य अनेक सहयोगी मौजूद थे। इन सभी ने डॉ. शुक्ला के मतों का पूर्ण समर्थन करते हुए यात्रा के विविध आयामों पर अपने व्यक्तिगत अनुभवों को साझा किया, जो उपस्थितजनों के हृदयों में गहन छाप छोड़ गए।
यह समारोह केवल एक स्वागत अनुष्ठान नहीं, अपितु सनातन मूल्यों को आधुनिक परिप्रेक्ष्य में सजीव बनाने का एक महान संकल्प सिद्ध हुआ। डॉ. प्रियंका शुक्ला दीदी के कुशल नेतृत्व में श्री ललिता त्रिपुरेश्वरी शक्तिपीठ न केवल धार्मिक अनुष्ठानों का केंद्र बनेगा, अपितु सामाजिक क्रांति का एक अटल आधारस्तंभ भी सिद्ध होगा। रामपुर के निवासियों ने इस प्रसंग पर प्रतिज्ञा ली कि वे सनातन दर्शन को ग्रहण कर अपने दैनंदिन जीवन में एकता एवं सेवा का सूत्र अपनाएंगे। भविष्य में शक्तिपीठ द्वारा संचालित होने वाली ऐसी अन्य पहलों से जिले में सकारात्मक परिवर्तन की धारा अवश्य ही उफान मार लेगी।

