याद करोगे मुझको- SEEMA RANGA INDRA
याद करोगे मुझको हरपल,पढ़कर मेरे गीत।
अक्षर अक्षर में ढूंढोगे,मुझको मेरे मीत।।

पुस्तक मेरी रख अब सोते,समझ सके ना पीड़
खुद को तुम तन्हा पाओगे,हो चाहे जग भीड़
शब्द शब्द में छलकेगा जी,उल्फत का संगीत
याद करोगे मुझको हरपल,पढ़कर मेरे गीत।।
बंद करो तुम मत अपना ये,आपस का संवाद
वरना बढ़ जाएगा दिलबर,मन का शुचित विवाद
शाश्वत प्रेम रहेगा चाहे,मुझे मिले ना जीत
याद करोगे मुझको हरपल,पढ़कर मेरे गीत।।
समय बीत जाएगा यह भी,कट जाएगी रात
भले आस में दिन गुजरे पर,होगी इक दिन बात
बीते बेशक साल महीने*,प्यार रहे नवनीत
याद करोगे मुझको हरपल,पढ़कर मेरे गीत।।
लिखा गीत में मैंने प्रियवर,करती हूँ मैं प्यार
कलम उठाकर तुम लिख देना,है मुझको स्वीकार
छंद अलंकारों में प्रेमिल,लिखती हूँ निज प्रीत।
याद करोगे मुझको हरपल ,पढ़कर मेरे गीत।।
सीमा रंगा इन्द्रा
