मातृभाषा के साथ अन्य भारतीय भाषा सीखना चाहिए: न्यायमूर्ति आर महादेवन

यह सर्व विदित है कि 11 दिसम्बर भारत सरकार द्वारा भारतीय भाषा दिवस के रूप में घोषित है। इस तिथि को भारत के महान कवि चिन्नास्वामी सुब्रामनियम भारती का जन्म हुआ था। भारतीय भाषा अभियान और भारतीय विधिज्ञ परिषद(बीसीआई ) के संयुक्त तत्त्वाधान में 18-12-2025 को 5 से 18 दिसंबर 2025 तक भारतीय भाषा अभियान की देशव्यापी इकाइयों द्वारा मनाए जाने वाले भारतीय भाषा दिवस पखवाड़ा समापन समारोह का आयोजन सायं 4 बजे भारतीय विधिज्ञ परिषद, नई दिल्ली के सभागार में हुआ। इसके मुख्य अतिथि माननीय न्यायमूर्ति सर्वोच्च न्यायालय श्री आर. महादेवन जी हैं तथा मुख्य बक्ता डॉ श्री अतुल कोठारी जी है। इस कार्यक्रम के आयोजक श्री जयदीप रॉय, अधिवक्ता, राष्ट्रीय संयोजक भारतीय भाषा अभियान, भी राघवेन्द्र शुक्ल, अधिवक्ता, संयोजक, भारतीय भाषा-अभियान दिल्ली प्रांत, श्री कृष्ण कुमार शर्मा आधवक्ता, सह संयोजक भारतीय भाषा अधियान, दिल्ली प्रोत, है।


भारतीय भाषा दिवस को मनाने की आवश्यकता भारत में भाषाई समन्वय के उद्देश्य से है। भारत वर्ष एक बहू भाषाई देश है। यह प्रत्येक व्यक्ति के द्वारा अपनी मातृ‌भाषा के अतिरिक्त एक अन्य भारतीय भाषा के अध्ययन से ही संभव है।

कार्यक्रम का आरम्भ अतिथियों के स्वागत से हुआ। कार्यक्रम में तमिल भाषा एवं संस्कृति की प्रधानता रखी गयी।

कार्यक्रम में चिन्नास्वामी सुब्रमण्यम भारती के गीतों को आधार बनाकर भारतनाट्यम् नृत्य प्रस्तुत किया गया ।

श्री जयदीप रॉय ने कार्यक्रम का उद्देश्य प्रस्तुत किया और सुब्रमण्यम भारती के भाषाई योगदान प्रस्तुत के बारे में बताया तथा आग्रह किया कि अपनी मातृ‌भाषा के अतिरिक्त एक अन्य भारतीय भाषा को सीखें।

मुख्य वक्ता श्री अतुल भाई कोठारी ने बताया कि भारतीय भाषाये जोड़ने का काम करती हैं। इस कार्य की प्रेरणा सुब्रह्मण्यम भारती के जीवन से मिलती है। उन्होंने मेरा देश मेरी भाषा पर बल दिया। एक देश एक संस्कृति के समन्वय पर बल दिया। मातृ‌भाषा के अतिरिक्त एक और अन्य राज्यों की भाषा सीखने पर बल दिया। हस्ताक्षर मातृभाषा में करे। देश की विविध भाषाएं एक परिवार की भाषाएं हैं।

मुख्य अतिथि सर्वोच्च न्यायालय के माननीय न्यायमूर्ति श्री आर महादेवन जी ने कहा कि महाकवि चिन्नास्वामी सुब्रमण्यम भारती जी ने अपना संपूर्ण जीवन भारतीय भाषाओं, संस्कृति और स्वतन्त्रता के लिए समर्पित किया। बिना भाषाई स्वाभिमान के राजनीतिक स्वतन्त्रता संभव नहीं। मातृभाषा के बिना जीवन संभव नहीं। भारतीय भाषाओं के विविधता का संरक्षण आवश्यक है। सभी भाषाएं भारत की भाषाएं हैं। सभी भाषाओं का आदर एवं उनमें समन्वय आवश्यक है।
राघवेन्द्र शुक्ल जी के धन्यवाद ज्ञापन के पश्चात राष्ट्रगान के साथ भारतीय भाषा दिवस के उपलक्ष्य में आयोजित 14 दिवसीय पखवाड़ा कार्यक्रम सम्पन्न हुआ।

भारतीय भाषा अभियान दिल्ली प्रांत