जीवन का दर्पण

जीवन का दर्पण ( Aaina-e- Zindagi )

आज की जीवन-धारा तेज़ है, पर ठहराव भी आवश्यक है,

सपनों के इस कोलाहल में, निर्मल-सा मन भी आवश्यक है।

कोई मौन रहकर परिश्रम करे, सत्य को अपना आधार बनाए,

कोई धन के अभिमान में, स्वयं की दृष्टि खो जाए।

युवाओं के चरणों में शक्ति है, साहस और विश्वास भरा,

पर वही पथ उज्ज्वल हो, जहाँ मानवता का दीप जला।

क्षणिक यश का मद थोड़े में, स्वयं ही टूट जाता है,

जो धरती से जुड़े रहते हैं, वही ऊँचाइयाँ पाता है।

बोलने से पहले सोचना भी, एक सुंदर संस्कार है,

जो शब्द हृदय को जोड़ें, वही सच्चा आचार है।

यह ग़ज़ल प्रश्न नहीं करती, दर्पण बनकर बतलाती है,

परिवर्तन की राह चुनना, हर मन स्वयं अपनाता है।

By Mrs. Satwinder Kaur